प्रदेश के राजकीय पशु वनभैंसे के शिकार की कोशिश, छह शिकारियों को...

प्रदेश के राजकीय पशु वनभैंसे के शिकार की कोशिश, छह शिकारियों को…

kabirdham vanbhainsa poachers arrested, neur forest area, navpradesh,

kabirdham vanbhainsa poachers arrested

शिकारियों ने वनभैंसे के पैर में मारा था तीर, अब वह खतरे से बाहर

कवर्धा/नवप्रदेश। कबीरधाम (kabirdham vanbhainsa poachers arrested) जिले की ग्राम पंचायत नेउर के वनांचल क्षेत्र (neur forest area) में प्रदेश के राजकीय पशु वनभैंसे को तीर मारकर जख्मी करने वाले शिकारियों को पकड़ने में वनविभाग को कामयाबी मिली है।

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वन मंडल अधिकारी दिलराज प्रभाकर ने घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने शिकारियों को पकड़ने के लिए टीमों का गठन कर दिया था और जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिए। जिसके बाद आरोपियों को पकड़ने में जुटी वनविभाग की टीम को मुखबीर से आरोपियों के बारे में क्लू मिल गया।

मप्र से लगा हुआ है वनक्षेत्र

जिसके आधार पर वन विभाग की टीम ने छह शिकारियों को पकड़ लिया। वहीं वनभैंसे की हालत खतरे से बाहर है। बता दें कि कबीरधाम (kabirdham vanbhainsa poachers arrested) जिले की ग्राम पंचायत नेउर का वनांचल (neur forest area) क्षेत्र मध्यप्रदेश से लगा हुआ है। इस क्षेत्र में अनेक प्रकार के वन्य प्राणी विचरण करते हैं। वनभैंसे की हालत का पता लगाने पहुंची वनविभाग की टीम को संबंधि परिक्षेत्र के रेंजर, एसडीओ, बीट गार्ड व पशु चिकित्सक ने जानकारी दी की वनभैंसा खतरे से बाहर है। और वह चल फिर रहा है। इसके साथ ही वनभैंसा घने जंगलो की ओर चला गया है।

 जल्दी भर जाएगा वनभैंसे का जख्म

पशु चिकित्सक के अनुसार इस उक्त वंनाचल क्षेत्र में ज्यादातर दहीमन के पौधे पाए जाते हैं, जिसे वन्य प्राणी जख्मी होने पर खाते हैं और उनका जख्म जल्द ही भर जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि वनभैंसे पैर में जो तीर लगा हुआ है वह भी असानी से विचरण के दौरान निकल जाएगा। वनभैंसा खतरे से बाहर है। इसके साथ ही वन विभाग की टीम उसपर नजर रखे हुए हैं।

इनकी हुई गिरफ्तारी

बनभैंसे के शिकार की कोशिश के मुख्य आरोपी टीका लाल बैगा व अन्य आरोपियों-  सुखीराम, सुखसिंग, केबउ, प्रीतलाल, रमलु बाहपानी को ग्राम पंचायत कांदावानी से पकड़ा गया है। आरोपियों के पास से तीर कमान और गुलेल जब्त किए गए हैं। आरोपिया के विरुद्ध पीओआर जारी कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। प्रकरण को वन्य प्राणी सरंक्षण अधिनियम 1972 की धारा के तहत कार्रवाही की जा रही है।

 

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