कर्मठ व सूझ-बूझ के धनी छग कैडर के IAS और NMDC के CMD एन बैजेंद्र कुमार हुए रिटायर

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  • भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर एनएमडीसी के सीएमडी के रूप में थे पदस्थ, जाना जाता है एनएमडीसी के संकट मोचक के रूप में
  • सर्विस के अंतिम दिन किया भावुक ट्वीट

रायपुर/नवप्रदेश। छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस (ias) अधिकारी और भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर एनएमडीसी (nmdc) के सीएमडी (cmd) पद पर पदस्थ एन बैजेंद्र कुमार (n baijendra kumar) सेवानिवृत्त (retires) हो गए।

एन बैजेंद्र कुमार (n baijendra kumar) को छत्तीसगढ़ कैडर के गंभीर, कर्मठ व बेजोड़ सूझ-बूझ वाले आईएएस (ias) के रूप में जाना जाता है। बतौर सीएमडी (cmd) पिछले साल वे एनएमडीसी (nmdc) के संकट मोचक के रूप में नजर आए। अपने कुशल नेतृत्व व छह माह तक किए अथक प्रयासों से छत्तीसगढ़ सरकार को एनएमडी की प्रदेश में स्थित चार खदानों की लीज के नवीनीकरण के लिए मना लिया था। सीएम भूपेश बघेल से मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने एनएमडीसी की चार खदानों की माइनिंग लीज की अवधि को बढ़ा दिया था।

ये लिखा ट्वीट में

वे अब रिटायर (retires) हो गए। शुक्रवार को उनकी सर्विस का अंतिम दिन था। अपने रिटायरमेंट को लेकर आईएएस (ias) और एनएमडीसी के निवर्तमान सीएमडी एन बैजेंद्र कुमार ने भावुक ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा-और इस तरह बतौर आईएएस यह मेरी 35 साल की यात्रा का आखिरी दिन है। मुझे जो भी जिम्मेदारियां दी गईं उनमें मैंने हमेशा भारतीय व भारतीयों को पहले रखा। यह मेरे परिवार, सहयोगी और आप सबके सहयोग के बिना संभव नहीं था। एक भावुक दिन, आप सभी को धन्यवाद।’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंन लिखा- ‘मैंने कई अच्छे संस्थानों में विभिन्न पदों पर काम किया लेकिन एनएमडीसी मेरे लिए हमेशा खास रेगा। यह वो जगह है जहां मैं बहुत कुछ अलग कर सका और यहां जो मैंने व मेरी टीम ने हासिल किया उस पर बेहद गर्व है। सभी 5700+ रियल मेटल को मेरा सहयोग करने धन्यावाद।’

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में भी दिया था अपनी सूझ-बूझ का बेजोड़ परिचय


पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में आईएएस एन बैजेंद्र कुमार तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रमुख सचिव थे। तब सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन ने नक्सलियों को बंधक बना लिया था। लेकिन एन बैजेंद्र कुमार ने अपनी सूझ बूझ का परिचय देते हुए उनकी रिहाई का मार्ग का प्रशस्त किया था और मेनन नक्सलियों के चंगुल से सुरक्षित वापस लौट आए थे।

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