World Cup 2019 Final : न्यू जीलैंड और इंग्लैंड के बीच फाइनल आज, मिलेगा नया चैंपियन

लंदन। आज जब इंग्लैंड और न्यू जीलैंड  World Cup 2019 Final ‘होम ऑफ क्रिकेट’ लॉर्ड्स पर उतरेंगे तो इनमें से एक को क्रिकेट की दुनिया का नया चैंपियन बनने का तमगा हासिल होगा। दुनिया को आज क्रिकेट का नया बादशाह मिल जाएगा। क्रिकेट को नई बुलंदी पर पहुंचाने के लिए इस खेल में इन दोनों देशों को किसी बड़ी सफलता का इंतजार वर्षों से है। न्यू जीलैंड के नाम एक चैंपियंस ट्रोफी और इंग्लैंड के खाते में एक वल्र्ड टी20  ट्रोफी जरूर है। मगर, फाइनल और सेमीफाइनल तक के सफर के बावजूद इन दोनों देशों ने क्रिकेट का सबसे बड़ा सम्मान, 50 ओवर फॉर्मेट का वल्र्ड कप एक बार भी नहीं हासिल किया है। आज जब दोनों देश ‘होम ऑफ क्रिकेट  लॉड्र्स पर उतरेंगे तो इनमें से एक को क्रिकेट की दुनिया का नया चैंपियन बनने का तमगा हासिल होगा। बादशाहत की महाजंग आज अपने आखिरी मुकाम पर होगी। दुनिया को आज क्रिकेट का नया बादशाह मिल जाएगा।
जो, जॉनी, जेसन की ताकत
लॉड्र्स की कंजूस टाइप पिच पर रनों की बारिश संभव नहीं लगती। बावजूद इसके होम टीम अपनी जो (रूट), जॉनी (बेयरस्टो) और जेसन (रॉय) की शक्ति पर भरोसा कर सकती है। इन तीनों के साथ इंग्लिश टीम के पास (बेन) स्टोक्स पावर भी है। फाइनल तक के सफर में इंग्लैंड के साथ अच्छी बात यह रही है कि वह बैटिंग में किसी एक बल्लेबाज के सहारे आगे नहीं बढ़ा है। टॉप-10 बल्लेबाजों में उसके तीन-तीन शामिल हैं।
इस वल्र्ड कप में अब तक रूट ने 10 मैचों में 549 (ऐवरेज 68.62), बेयरस्टो ने 10 मैचों में 496 (ऐवरेज 49.60) और रॉय ने 7 मैचों में 426 (ऐवरेज 71.00) रन बनाए हैं। इनके ठीक पीछे बेन स्टोक्स हैं जिनके बल्ले से 10 मैचों में 381 रन (54.42 ऐवरेज) निकले हैं। फाइनल तक के सफर में चार बल्लेबाजों का लय में होना किसी टीम के लिए आदर्श स्थिति कही जा सकती है। अब अगर ओवरकास्ट कंडिशन में लॉड्र्स पर सुबह-सुबह गेंद लहराती है और इंग्लैंड को बैटिंग की चुनौती मिल जाती है तो उसके ड्रेसिंग रूम में चेहरे नहीं उतरे होंगे।
केन के कंधे पर बड़ा बोझ
बल्लेबाजी के मोर्चे पर इंग्लैंड जहां पूरी तरह आश्वस्त कहा जा सकता है वहीं कीवी खेमे में ऐसी निश्चिंतता कतई नहीं दिखती है। फाइनल तक का इनका सफर मूल रूप से कप्तान केन विलियमसन के कंधे पर तय हुआ है। टॉप-5 में शुमार कीवी कप्तान के नाम 9 मैचों में 548 रन (ऐवरेज 91.33) हैं। उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के बीच रॉस टेलर ने भी 9 मैचों में 335 रन (ऐवरेज 41.87) जोड़े हैं। वह जितने बड़े खिलाड़ी हैं उतने भरोसमंद साबित नहीं हुए हैं इस वल्र्ड कप में। सेमीफाइनल में भारत के खिलाफ ओल्ड ट्रैफर्ड की मुश्किल पिच पर थोड़ा जमकर खेलने के बाद संभव है कि उनका कॉन्फिडेंस लौटा हो। करियर के इस सबसे बड़ी परीक्षा में रॉस अगर चल गए तो केन के कंधों का बोझ थोड़ा कम होगा। वैसे कीवी टीम के पास मार्टिन गप्टिल के रूप में एक विध्वंसक बल्लेबाज भी है। कोलिन डी ग्रैंडहोम भी अपने दिन कुछ भी कर गुजरने की क्षमता रखते हैं। बड़ा सवाल होगा कि क्या मौके पर इनका चौका लगेगा।

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