ज्योत्सना और ज्योति नहीं, महंत और मोदी के बीच चल रही खंदक की लड़ाई

अरूण श्रीवास्तव

मनेन्द्रगढ़। कोरबा लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है। हालांकि नामांकन के अंतिम समय तक यहां त्रिकोणीय संघर्ष होने की संभावना जताई जा रही की, क्योंकिजनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कोरबा लोकसभा सीट से लडऩे की घोषणा की थी, लेकिन अब जोगी के पलटने से साफतौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधी टक्कर देखी जा है। कोरबा लोकसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है, इसके बावजूद यहां सामान्य और पिछड़े वर्ग के प्रत्याशियों का ही दबदबा रहा है। कोरबा लोकसभा सीट के अंतर्गत 8 विधानसभा सीट आती है जिनमें भरतपुर-सोनहत, रामपुर, पाली-तानाखार, मनेन्द्रगढ़, कोरबा, मरवाही, बैकुंठपुर और कटघोरा शामिल है। 2008 में परिसीमन के बाद वजूद में आई कोरबा लोकसभा सीट पर 2009 में जहां कांग्रेस के डॉ. चरण दास महंत को सफलता मिली थी तो वहीं 2014 में भाजपा के डॉ. बंशीलाल महतो ने जीत हासिल की थी। डॉ. चरण दास महंत वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष हैं। सामान्य सीट होने के चलते कोरबा लोकसभा सीट को सिसयासी दांव-पेंच के लिए अहम माना जाता है। 2014 में भाजपा को 4 लाख 39 हजार 2 मत प्राप्त हुए थे वहीं कांग्रेस को 4 लाख 34 हजार 737 मत मिले थे।

इस प्रकार 2014 चुनाव में जीत का अंतर मात्र 4 हजार 265 रहा। अब बात करते हैं इस बार के लोकसभा चुनाव में तो सियासत के जानकार मानते हैं कि जोगी के चुनाव मैदान छोड़ देने से कांग्रेस प्रत्याशी को सीधा और बड़ा लाभ मिल सकता है, क्योंकि जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार काबिज हुई है जोगी कांग्रेस बिखरती जा रही है। आए दिन बड़े पदाधिकारियों से लेकर कार्यकर्ताओं की फौज जोगी का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम रही है। वहीं चार माह पहले संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर और लकीर अभी भी कायम है। दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी ज्योतिनंद दुबे अचानक से आया वह नाम है जिसे सुनकर भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मतदाता भी चौंक गए थे। गौरतलब है कि टिकट के लिए भाजपा की ओर से दौड़ में कोरबा से योगेश लांबा, विकास महतो, लखन लाल देवांगन तो वहीं कोरिया जिले से पूर्व श्रम मंत्री भईयालाल राजवाड़े, पूर्व विधायक श्यामबिहारी जायसवाल व दीपक पटेल के नाम शामिल थे, लेकिन इन आधा दर्जन दावेदारों पर पार्टी ने भरोसा न जताकर नए चेहरे पर दांव लगाया है। इससे जहां इस सीट पर भाजपा का मोराल डाउन दिख रहा है वहीं भाजपा कार्यकर्ता भी एकजुट होकर चुनाव लड़ते नहीं दिख रहे हैं। भाजपा गुटबाजी से घिरी हुई है वहीं प्रचार में भी पिछड़ी है। दूसरी ओर कांग्रेस ने सर्वसम्मति से डॉ. चरण दास महंत की पत्नी ज्योत्सना महंत को चुनाव मैदान में उतारा है।

वर्तमान में सूबे में कांग्रेस का काबिज होना भी फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इसके अलावा भाजपा सांसद बंशीलाल महतो ने कोरबा और कोरिया जिले में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किए हैं जिसका खामियाजा वर्तमान प्रत्याशी को उठाना पड़ सकता है जबकि पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. चरण दास महंत के कार्यकाल में कोरबा और कोरिया जिले में सड़क, रेल सुविधा, दोनों ही जिलों में एग्रीकल्चर कॉलेज, कृषि के क्षेत्र में जो काम किए गए हैं उसका फायदा उनकी पत्नी को मिल रहा है। कुल मिलाकर यह कहें कि भाजपा प्रत्याशी को मात्र मोदी के नाम का ही सहारा है जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को अपने पति डॉ. चरण दास महंत के काम और नाम का अच्छा फायदा मिल रहा है। सही मायनों में कोरबा लोस में प्रत्याशियों ज्योत्सना और ज्योति के बीच टक्कर नहीं है, बल्कि मोदी के नाम और महंत के काम के बीच खंदक की लड़ाई चल रही है। सियासतविद् मान रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के कोरबा में गरजने के बाद भी बीजेपी में तेजी व सक्रियता नहीं आती है तो इस सीट पर कांग्रेस सम्मानजनक जीत की ओर बढ़ सकती है। बहरहाल इन सबके विपरीत 23 अप्रैल को कोरबा लोकसभा क्षेत्र के आठों विधानसभाओं के मतदाताओं को नेताओं और दलों के एजेण्डों को नहीं बल्कि अपने एजेण्डे और आने वाली पीढ़ी के सुनहरे भविष्य को ध्यान में रखकर मताधिकार का प्रयोग करना होगा और ऐसे प्रत्याशी के नाम और निशान का बटन दबाना होगा जो आम-आवाम की आवाज को देश की संसद तक पहँुुचाकर विकास के नये आयाम गढऩे का माद्दा रखता हो।

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