श्यामू और जुगाड़ू मर गए, लापता रामू को तलाश नहीं पा रहा विभाग

  • जिन वनभैंसों के संरक्षण, संवर्धन के लिये बना है उदंती अभयारण्य, वहां अब महज 6 नर और दो मादा ही बचीं

जीवन एस साहू
गरियाबंद। जिले में स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व udanti sitanadi tiger reserve के उदंती अभ्यारण में पाए जाने वाले शुद्ध प्रजाति के राजकीय पशु रामू नामक वनभैंसा van bhaisa पिछले तीन वर्षों से यहां के जंगल से लापता है। विभाग लगातार इसकी खोजबीन में लगी हुई है, इसके बावजूद लापता वनभैंसा का अब तक पता नहीं चल पाया है। यह टाइगर रिजर्व क्षेत्र 1842 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो खुला जंगल है। जिसके कारण इस वनभैंसे van bhaisa को ढूंढने में विभाग को खासी मशक्कत लगानी पड़ रही है। बाकायदा इसके लिए विभाग ने टीम भी गठित की है। बस्तर के जंगल के अलावा ओडिशा के जंगलों में भी वनभैंसे रामू की तलाश की गई। यह वनभैंसा यहां के जंगल से कहां चला गया, इसके लोकेशन को लेकर भी विभाग अब तक अनजान है। इस रामू नामक वनभैंसा van bhaisa में कॉलर आईडी नहीं लगाए जाने की वजह से इसकी तलाश करने में विभाग अब तक विफल रहा है।


जानकर ताज्जुब होगा कि भारत में शुद्ध नस्ल के वनभैंसे van bhaisa इस टाइगर रिजर्व क्षेत्र के उदंती अभयारण्य में पाया जाता है। जानकारी के मुताबिक विभाग वनभैंसे की संख्या में वृद्धि करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, परंतु संख्या वृद्धि होने के बजाय घटती जा रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस टाइगर रिजर्व क्षेत्र के उदंती अभ्यारण udanti sitanadi tiger reserve में कुल आठ वनभैंसे हैं, जिसमें से शुद्ध नस्ल के वनभैंसा van bhaisa की संख्या एक है। खुशी नामक मादा वनभैंसी वर्तमान में गर्भवती है, आगामी अगस्त माह में नए मेहमान के आने की संभावना विभाग ने जताई है। 8 वनभैंसों में से 6 नर और दो मादा हैं। रेस्क्यू सेंटर भी वनभैंसों के लिए बनाया गया है। जो कंटीले तारों से घेरा गया है, जिसका एरिया नहीं के बराबर है। गौरतलब है कि भारत के अलावा अन्य देशों में बर्मा, नेपाल और थाईलैंड में वनभैंसा पाये जाते हैं। भारत में काजीरंगा के अलावा बस्तर और गरियाबंद क्षेत्र में वनभैंसा पाए जाते हैं।

वनभैंसों का प्राकृतिक आवास स्थल है उदंती

उदंती अभयारण्य यद्यपि छोटा है, फिर भी महत्वपूर्ण है। अभयारण्य जंगली भैंसों की बहुतायत के लिए प्रसिद्ध है, जो कि दुर्लभ वनभैंसा का प्राकृतिक आवास स्थल है। इसकी स्थापना 1983 में की गई थी, यह अभयारण्य लगभग 232 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। इस अभयारण्य के बीच मैदानी हिस्सों के साथ बहुत सी छोटी-छोटी पहाडिय़ां हैं। यह सुंदर अभयारण्य पश्चिम से पूर्व के ओर बहने वाली उदंती नदी के नाम पर बनाया गया है, जो इस अभयारण्य के अधिकांश भाग में बहती है। उदंती अभयारण्य में वनभैंसों van bhaisa के संरक्षण एवं संवर्धन प्रक्षेत्र बनाया गया है, जो कि 20 हेक्टेयर का एक बाड़ा है जिसे चोरों ओर से घेरा गया है। बीते वर्ष हुए वनभैंसा श्यामू की मौत उसके बाद गत माह जुगाड़ू वनभैंसा की मौत और रामू वनभैंसा के अब तक लापता होने से उदंती अभयारण्य में 8 वनभैंसे शेष रह गए हैं।

रामू की तलाश लगातार जारी है: रायस्त

इस संबंध में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व विभाग udanti sitanadi tiger reserve के प्रभारी उप निदेशक आर के रायस्त ने बताया कि लापता वन भैंसे की तलाश लगातार की जा रही है। परंतु कई वर्षों बाद भी पता नहीं चल पाया है। इसके लिए टीम का गठन किया गया है, सीमावर्ती ओडिशा के जंगल में भी तलाश जारी है।

मोहन की एक्टिविटी पर निगरानी

मिली जानकारी के अनुसार बाड़ा के अंदर मादा वनभैंसा आशा, किरण उर्फ खुशी, वीरा, छोटू, सोमू को रखा गया है, वहीं मोहन को बाड़े में अलग से अकेले उसकी एक्टिविटी देखने के लिये रखा गया है। इसके अलावा प्रिंस, राजा नाम के वनभैंसा उदंती अभयारण्य udanti sitanadi tiger reserve में पाए जाते हैं। वनभैंसों की घटती संख्या को देखते हुए इन्हें बचाए रखने के लिए उदंती प्रशासन प्रयासरत है।

Share

Leave a Comment