Breaking: खरीदने के 4 माह में मोबाइल खराब, कंपनी पर ठोका 34 हजार का हर्जाना

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दुर्ग/नवप्रदेश। मोबाइल (mobile) खरीदे जाने के 4 महीने में ही इसमें आई खराबी (defect) के चलते जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग (district consumer forum durg) ने मोबाइल निर्माता कंपनी व सर्विस सेंटर (manufacturing company and service centre ) पर 34 हजार रुपए (34 thousand) का हर्जाना (recompense) लगाया है।

मोबाइल वारंटी पीरियड में  ही था लेकिन इसमें तकनीकी समस्या और मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (defect) आ गया। उपभोक्ता के सर्विस सेंटर पर ले जाने के बाद भी मोबाइल (mobile) दुरुस्त करके नहीं दिया गया। जिसके बाद उपभोक्ता ने फोरम का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता का जिम्मेदार मानते हुए सर्विस सेंटर एवं निर्माता कंपनी ( service centre and manufacturing company) पर 34000 रुपए (34 thousand) का हर्जाना (recompense) लगाया।

ये है मामला

परिवाद के मुताबिक नेहरू नगर भिलाई निवासी जयप्रकाश सिन्हा ने 5 जून 2016 को लीमाल डॉट कॉम के माध्यम से लिको कंपनी का मोबाइल (mobile) ऑनलाइन खरीदा था। इसे पुणे स्थित सप्लायर वोरा एंड वोरा टेक्नोलॉजीस द्वारा ऑनलाइन बेचा गया था। 12 महीने की वारंटी दी गई थी। मोबाइल में खराबी (defect) आने पर परिवादी ने मोबाइल को भिलाई स्थित सर्विस सेंटर ‘प्रिशा कम्युनिकेशन’ में दिनांक 24 अक्टूबर 2016 को दिखाया। सेंटर ने 30 अक्टूबर 2016 तक दुरुस्त करके देने की बात कही, लेकिन ऐसा नहीं किया।

सर्विस सेंटर का जवाब

प्रकरण में पुणे का सप्लायर दुकानदार एवं निर्माता कंपनी अनुपस्थित रहे, लेकिन भिलाई स्थित सर्विस सेंटर प्रिशा कम्युनिकेशन ने प्रकरण में उपस्थित होकर दलील दी कि परिवादी के मोबाइल (mobile) का जॉब कार्ड बनाया गया था। मोबाइल की मेन बोर्ड खराब थी, पर परिवादी नए मोबाइल की मांग कर रहा था। इस पर सर्विस सेंटर द्वारा कंपनी में कई बार ईमेल किया गया। परिवादी की समस्या का समाधान करने का हरसंभव प्रयास किया गया।

जवाब ही बना फैसले का आधार

जिला उपभोक्ता फोरम (district consumer forum durg) ने सर्विस सेंटर (service centre) के जवाब के आधार पर पाया कि सेंटर ने खुद ही यह बात मानी है कि परिवादी के मोबाइल की मेन बोर्ड खराब थी। इससे यह प्रमाणित हुआ कि परिवादी के मोबाइल में खरीदी पश्चात वारंटी अवधि में ही गंभीर तकनीकी एवं निर्माणगत त्रुटि (defect) की समस्या आई थी। जिसे अनावेदक पक्ष ठीक करने में सक्षम नहीं था। लिहाजा उस प्रोडक्ट पर अविश्वास कर उसे रिप्लेस किए जाने या उसकी संपूर्ण कीमत की वापसी की मांग परिवादी ने की है तो यह अनुचित नहीं है। फोरम ने परिवादी को मोबाइल की संपूर्ण कीमत पाने का हकदार माना।

मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार

फोरम (district consumer forum durg) ने परिवादी को मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरूप 10000 रुपए अदा किए जाने का भी आदेश दिया। फोरम ने कहा कि मोबाइल के लिए परिवादी परेशान रहा इसलिए वह मानसिक क्षतिपूर्ति पाने का हकदार है। इस तरह फोरम ने कुछ 39999 का हर्जाना (recompense) लगाया। अनावेदक पक्ष ( service centre and manufacturing company) को एक माह के भीतर यह राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित परिवादी को अदा करनी होगी।

हर्जाने का पूरा गणित

मोबाइल की कीमत-  22999 रुपए,

मानसिक क्षतिपूर्ति-  10000 रुपए

वाद व्यय- 1000 रुपए

कुल हर्जान- 33999 रुपए

 

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