जो गोठान स्वीकृत ही नहीं उसके लिए काटे जा रहे पांच एकड़ के पेड़, जिम्मेदारों को…

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  • गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासख्ंाड की अमाड़ ग्राम पंचायत का मामल
  • ग्रामीण कह रहे-बनेगा गोठान, पं सचिव समेत अफसर बोले- स्वीकृत ही नहीं

मैनपुर/नवप्रदेश। गरियाबंद (gariaband tree falling) जिले के मैनपुर विकासखंड (mainpur) की अमाड़ ग्राम पंचायत (amad gram panchayat) अंतर्गत करीब 5 एकड़ वनक्षेत्र मेंं पेड़ों की कटाई की जा रही है। लेकिन यह कटाई क्यों की जा रही है, इसका ग्रामीणों को छोड़कर किसीको पता नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस भूमि पर गोठान बनने जा रहा है। लेकिन पंचायत (amad gram panchayat) से लेकर जनपद व जिला स्तर के कर्मचारी अधिकारियों को भी नहीं पता कि कटाई क्यों हो रही है। इस मामले में पंचायत सचिव प्रेम कुमार ध्रुव का कहना है कि अमाड़ पंचायत की उक्त भूमि पर गोठान स्वीकृत नहीं है। पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं इसके बारे में ग्रामीण ही बता पाएंगे।

गरियाबंद (gariaband tree falling) जिले के मैनपुर (mainpur) जनपद पंचायत के सीईओ का भी कहना है कि उक्त ग्राम पंचायत मेंं गोठान स्वीकृत नहीं है।

वहीं ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि पर गोठान बनने वाला है। शासन के निर्देशानुसार जहां किसी साधारण हरे-भरे पेड़ को भी बिना अनुमति से नहीं काटा जा सकता वहीं उक्त 5 एकड़ वनक्षेत्र से सागौन, बीजा, सराई आदि कीमती किस्म के पेड़ों की कटाई ही जा रही है। ऐसे में संबंधित विभागों के जिम्मेदारों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

ट्रैक्टर में भरकर ले जा रहे लकड़ी, ठूंठ को लगा रहे आग

अमाड़ ग्राम पंचायत केे वनक्षेत्र में लोग पेड़ काटकर ट्रैक्टर में लादकर लकडिय़ां ले जा रहे हैं। इससे शासन को राजस्व नुकसान हो रहा है। यहीं नहीं ग्रामीणों द्वारा काटे गए पेड़ों के ठूंठ को आग भी लगाई जा रही है। इस आग में हर भरे वृक्षों को भी नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन आश्चर्य इस बात पर हो रहा है कि आखिर प्रशासन केे जिम्मेदार अधिकारी इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे।

एक-एक सचिव को तीन पंचायत का प्रभार

जिले में कुछ सचिवों को तीन-तीन ग्राम पंचायतों का प्रभार दिया गया है। जबकि नियम के मुताबिक एक सचिव को ज्यादा से ज्याा दो पंचायतों का ही प्रभार दिया जा सकता है। अमाड़ पंचायत के सचिव प्रेम कुमार ध्रुव को भी तीन-तीन पंचायतों (कुल्हाड़ीघाट, तोरेगा, अमाड़) का प्रभार दिया गया है। जिला पंचायत कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि विभाग ने वर्ष 2013 में पंचायत सचिवों की कमी को देखते हुए एक पंचायत सचिव को दो-दो पंचायत का कार्यभार सौंपने का निर्देश जारी किया था।

समय केे साथ कुछ पंचायत सचिवों को तीन-तीन पंचायतों का कार्य भी दे दिया गया। हालांकि अव्यवस्था से बचने के लिए तीसरी पंचायत का प्रभार देखने वाले सचिवों से एक पंचायत का प्रभार तत्काल वापस लेने के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। लेकिन जिले में इस पर अमल होता नहीं दिखाई दे रहा है।

इनका कहना है

तहसीलदार को आदेशित कर मामले की तुरंत जांच करवाता हूं।
-केके विहार, डिप्टी कलेक्टर

ग्राम पंचायत अमाड़ में गोठान अभी स्वीकृत नहीं हुआ है। ग्रामीणों द्वारा पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं मैं खुद जा कर देखता हूं। उसके बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
-नरसिंह ध्रुव, जनपद सीईओ, मैनपुर

ग्राम पंचायत अमाड़ में गौठान स्वीकृत नहीं है। ग्रामीण उस जमीन पर पेड़ क्यों काट रहे है और किस चीज का निर्माण कर रहे हैं मुझे नहीं पता।
-प्रेम कुमार ध्रुव, सचिव

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