सीएम बघेल को मातृ शोक

  • नम आंखों से सीएम मां को अंतिम समय में…
  • कार्डियक अरेस्ट, किडनी और सांस की थी तकलीफ
  •  रिजनों को पहले ही चिकित्सकों ने बुला लिया था

नवप्रदेश संवादाता
रायपुर। पूरे 13 दिनों तक सघन चिकित्सा में रहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माताजी श्रीमती बिंदेश्वरी बघेल का रविवार शाम को निधन हो गया। गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अचेतावस्था में रामकृष्ण केयर अस्पताल में 13 दिन पहले भर्ती करवाया गया था। तभी से उन्हें अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों और दिल्ली से आए एक्सपर्ट सर्जनों की देखरेख में रखा गया था। जब उन्हें भर्ती किया गया था तभी से उनकी हालत काफी बिगड़ी हुई थी। चिकित्सकों ने भी 24 घंटे का वक्त दिया था। दिल्ली से चिकित्सकों की टीम पहुंची और वेंटिलेटर में रखी गईं सीएम की मां बिंदेश्वरी बघेल को ठीक करने जुटी हुई थी। हर दिन की मेडिकल बुलेटिन में चिकित्सकों ने श्रीमती बघेल के स्वास्थ्य में बेहतर सुधार का भी बताया था। फिर अचानक ही सप्ताहभर पहले उन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद श्वांस नली के सिकुडऩे की वजह से ऑपरेट भी किया था। तभी से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। कुछ वक्त के लिए वेंटिलेटर हटाने फिर उन्हें वेंटिलेटर में रखने का यह सिलसिला चल ही रहा था। आज अचानक ही उनकी हालत बिगडऩे लगी। काफी मशक्कत के बाद भी जब चिकित्सक सफल नहीं हुए तो अंतिम वक्त पर सीएम भूपेश बघेल समेत परिजनों को सूचित किया गया। फौरन ही श्री बघेल परिवार समेत अस्पताल पहुंच गए थे। अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.अब्बास नकवी ने बताया कि मां के अंतिम वक्त में सीएम भूपेश बघेल भी उनके पास ही खड़े थे। उन्हें बचाने और सारी मेडिकल संभावनाओं का उपयोग भी सीएम के सामने ही किया गया है। सीएम खामोशी से नम आंखों से अपनी मां बिंदेश्वरी बघेल के अंतिम समय में उन्हें जाता देखते रहे। आखिरकार पल्स, हार्टबीट थमते ही चिकित्सकों ने जांच किया और फिर उन्हें ब्रेन डैड घोषित कर दिया।
खबर फैलते ही सभी पहुंचने लगे अस्पताल
सीएम श्री बघेल की मां के निधन की खबर आग की तरह फैल गई और उनके चाहने-जानने वालों का रामकृष्ण अस्पताल में तांता लगने लगा। सबसे पहले कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, स्कूल शिक्षा मंत्री खेलसाय सिंह, मंत्री शिव डहरिया, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री अमरजीत भगत पहुंचे। इसके बाद पीसीसी नेता-पदाधिकारियों का हुजूम लग गया। पुलिस भी सुरक्षा व यातायात का मोर्चा सम्हाल ली थी।

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