स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट का कार्य ड्रेसर संभाल रहे

नवप्रदेश संवाददाता
बीजापुर/आवापल्ली। जिले के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वस्थ समुदाय केंद्र उपचारी की कितनी बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है, इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज कराने आये हुए मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयां फार्मासिस्ट नही बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मरहमपट्टी करते वाले ड्रेसर दे रहे हैं जिन्हें कौन सी दवाई किस बीमारी की है इसका भी ज्ञान नही है यानी दवाइयों का खुराक अंदाजा ही थमा दिया जा रहा है। ऐसा ही वाक्या उसूर ब्लाक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिला। जहां डॉक्टर तो मिले ही नहीं मगर दवा वितरण कक्ष में बैठा कर्मचारी, उल्टी दस्त, बुखार, सिरदर्द जैसी छोटी मोटी बीमारी का इलाज कराने पहुंचे मरीजों को दवाइयां दे रहा था जब उनसे पूछा गया कि बिना डॉक्टर परामर्श के मरीज को दवाई दे रहे हैं, क्या आप फार्मासिस्ट है तो वहां मौजूद कर्मचारी का जवाब बेहद चौकाने वाला था। कर्मचारी ने बताया कि वह स्वास्थ्य केंद्र में बतौर ड्रेसर के पद नियुक्त है मगर फार्मासिस्ट नही होने की वजह से ब्लाक खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष उपाध्याय ने उन्हें बतौर फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी दे रखी है। जबकि आवापल्ली ,बासागुड़ा ,उसूर एवं आवापल्ली स्वास्थ्य केंद्रों में चार फार्मासिस्टों की भर्ती कर नियुक्त किया गया था परन्तु वर्तमान स्थिति में यह कर्मचारी किंस जगह अपनी सेवाएं दे रहे है इसका कुछ भी अता पता नही है। यही हाल बीजापुर जिले के भोपाल पटनम, मद्देड, आवापल्ली, बासागुड़ा, इलमिडी, कुटरू, गंगालूर, चेरपाल, नैमेड के ग्राम में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का हैं।
जिम्मेदार कर रहे खुद का गुणगान
इस प्रकार की फैली हुई अव्यवस्था दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कितने गैर जिम्मेदार हैं। जिन्हें जिम्मेदारियों का आईना दिखाना बेहद जरूरी है। वहीं इन क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों से जब खामियों के बारे में पूछे जाने पर स्वयम का गुणगान करने से पीछे नहीं रहते। जिनके बड़बोले बातों से ऐसा लगता है अपनी ही मुंह मियामि_ू हैं।

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