पीएचई के ईई कर रहे मनमानी, बिना टेंडर के मौखिक आदेश पर करा रहे हैं निर्माण कार्य, नहीं जरूरत है स्वीकृति की

ठ्ठ मौखिक आदेश पर बिना टेंडर व वर्क आर्डर के नहर की हो गयी खुदाई
ठ्ठ जांच में हुआ था स्वीकृति नहीं मिलने का खुलासा
ठ्ठ अब पाइप नहर में बिछने खरीदी गई हयूम पाइप
नवप्रदेश संवाददाता
बैकुण्ठपुर । जल संसाधन विभाग के ईई की ऐसी मनमानी की अचार संहिता के समय ही बिना टेंडर व वर्क आर्डर के ही नये नहर की खुदाई का काम सुरु करा दी पर अचार संहिता के बाद तक उसकी स्वीकृति नहीं मिली इसके बावजुद निर्माण कार्य स्थानिय भाजपा नेता के द्वारा कराया जा रहा है। सबसे आष्चर्य की बात तो यह है कि कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली फिर भी नहर की खुदाई कर दी गयी और सिकायत के बावजुद बिना कोई कार्यवाही के निर्माण कार्य पूर्व कलेक्टर के जाते ही पुन: सुरु भी करा दिया जब कि पूर्व कलेक्टर के निर्देश पर ही जाच टीम बनी थी जहा जाच टीम में राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल थे व जाच में स्वीकृति नही होने का खुलासा भी हुआ किन्तु जाच के लिए लिखे अधिकारी के स्थानांतरण होते ही जल संसाधन के अधिकारी ने पुन: कार्य जन हित में होने व प्रशासकिय स्वीकृति मिलने का हवाला देकर कार्य सुरु करा दिया किन्तु अब तक निर्माण स्थल पर कार्य के स्वीकृति व लॉगत के संबंध में कोई भी सूचना बोर्ड नही लगा न ही जिले के अधिकारी ने स्वीकृति के संबंध में आदेश की कॉपी उपलब्ध कराई जिससे कार्य मे शासकीय राशि के हेर फेर होने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता।


मिली जानकारी के अनुसार सिंचाई विभाग जल संसाधन को गेज जलाशय के पानी को ग्राम कसरा से बुढ़ार तक पहुंचाने इस कार्य के लिए लगभग 38 लाख रुपए स्वीकृत के लिए राज्य के उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन के साथ पत्र लिखा गया था जिसमें एक किमी नहर निर्माण होना था जिसमें 400 मी. खुली नहर और 600 मीटर पाईप लाईन से नहर का निर्माण करना था। इस राशि को खर्च करने के लिए अधिकारी कुछ ज्यादा ही सक्रिय है, जहां नहर की गुणवत्ता से उनका कोई सरोकार नहीं है यही कारण है कि ठेकेदार ने भाजपा शासनकाल के पूर्व मंत्री के निर्देश पर बिना कार्यादेश के ही जिले के अधिकारी के मौखिक निर्देश पर ही कार्य सुरु कर दिया और इस नहर की खुदाई मषीन के द्वारा करा कर पूरा कर दिया गया। वहीं पाईप लाईन बिछाने का काम प्रगति पर है पर आष्चर्य की बात यह है कि कार्य खत्म होने की कगार पर है और मानसून सत्र भी आ गया है जिसमें प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाती इसके बावजुद बिना स्वीकृति के ठेकेदार के सांठगांठ से अधिकारी निर्माण कार्य करा रहे है। इन्हें किसी भी कार्यवाही का कोई भय नहीं है यही वजह है कि अधिकारी बेखौफ होकर नियम विरूद्ध कार्य करने को अंजाम दे रहे है।
जल संसाधन विभाग हर साल नहरों की मरम्मत व निर्माण के नाम पर करोड़ो रूपये खर्च करता है पर जमीनी स्तर पर देखे तो आज भी किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा है वही जो कार्य पूर्व से प्रस्तावित है उन्हें न कर नए कार्य को ज्यादा प्राथमिकता दिया जा रहा जब कि आज भी जिले में निर्मित नहर के अंतिम छोर के किसान को पानी नही मिल पा रहा वही अधिकारी अब ए आर मद से कार्य को कराने में ज्यादा दिलचस्पी रख रहे जब कि पूर्व कलेक्टर ने पूर्व में खबर प्रकाशित होने पर फटकार भी लगाई थी किन्तु अधिकारी ने पूर्व कलेक्टर के स्थानांतरण होते ही पुन: कार्य सुरु करा दिया इसकी वजह सिर्फ जलसंसाधन विभाग के अधिकारीयों की लापरवाही है। जो इस प्रकार का अपना मनमानी चला रहे इन्हें किसी का भय और न ही नौकरी की चिंता। सिर्फ शासकीय राशि कैसे खर्च हो उन्हें इसकी चिंता ज्यादा है यही वजह है कि वह गलत काम करने नहीं कतराते।
खेती का काम शुरु, पर नहर की मिट्टी पड़ी है खेतों में
पाईप लाईन बिछाने के लिये नहर खोदवा दी गई और खोदी गई मिट्टी किसानों के खेत में रख दी गयी। वहीं अब खेती का समय आ गया है वहीं किसान खेती का काम करने को जुट गये है। पर जिन किसानों के खेतों में मिट्टी रखी गयी है। वह किसान मिट्टी नहीं हटने से परेशान है वही अधिकारी जनहित में किसानों से सहमति पर कार्य करने का दावा कर रहे ।
अधिकारियों को टेंडर की नहीं है जरूरत
जिले में बिना टेंडर व वर्क आर्डर के बिना अधिकारी मौखिक आदेश पर ही निर्माण कार्य सुरु कराने पर ज्यादा भरोसा रखते है ऐसा लगता है कि जिले में बिना टेंडर का कार्य कराने की प्रथा चल रही है। इस प्रथा के आधार पर जिले में कई बार ऐसी निर्माण हो चुका है और एक बार फिर जलसंसाधन विभाग का मामला सामने आया है जिस पर अधिकारी के मौखिक आदेश पर नहर की खुदाई कर दी और अब पाईप बिछाने का काम चल रहा है।
कलेक्टर ने दिए थे जांच के निर्देश
इस मामले में पूर्व कलेक्टर भोस्कर विलास संदिपान ने नव प्रदेश में प्रकाशित खबर के बाद जांच के आदेष दिए थे पर उनके जाते ही आनन फ ानन में फि र से कार्य शुरू हो गया। उसमें क्या कार्यवाही हुई इसका पता नहीं चल सका।

मुझे कोई आदेश नहीं दिया गया

काम कराने वाले ठेकदार से इस सम्बन्ध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मुझे कार्यपालन अभियंता ने मौखिक निर्देश पर कार्य शुरू करने को कहा था जिस आधार पर मेरे द्वारा कार्य कराया जा रहा है। इस संबंध में मुझे कोई आदेश नहीं दिया गया, आप कार्यपालन अभियंता से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
जगदीश साहू, पूर्व मंडी अध्यक्ष बैकुंठपुर

कार्य की स्वीकृति का अधिकार कार्यपालन अभियंता को

कार्य की स्वीकृति अब हो चुकी है। कुछ कार्य जनहित को देखते हुए ए आर मद से शुरू किया जा सकता है, जिसका अधिकार कार्यपालन अभियंता को है।
वीएस साहू, कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग बैकुंठपुर

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