एनटीपीसी, आईओसी भूलीं छत्तीसगढ़ के प्रति अपना दायित्व

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  • कार्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा
  • सीएसआर के कामों पर तीन साल से एक रुपया भी खर्च नहीं किया

ईश्वर चंद्रा/ कोरबा। छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के बलबूते करोड़ों, अरबों का मुनाफा कमाने वाली कुछ औद्योगिक कंपनियां (industrial companies) राज्य में अपने कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (csr) के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रही हैं (not serious)। इनमें एनटीपीसी (ntpc) , आईओसी (ioc) जैसी बड़ी सरकारी कंपनियां भी शामिल हैं।

कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय की रिपोर्ट ही इस बात की गवाही दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में स्थित विभिन्न औद्योगिक कंपनियों (industrial companies) ने वित्त वर्ष 2017-18 में केवल 72 करोड़ रुपए के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (csr) के कार्य किए।

जबकि वर्ष 2016-17 व 2015-16 में ये आंकड़े क्रमश: 85 करोड़ तथा 241.17 करोड़ रुपए थे। रिपोर्ट की खास बात यह है कि एनटीपीसी (ntpc) , आईओसी (ioc) जैसी बड़ी सरकारी कंपनियों ने बीते तीन वित्त वर्षों (वित्त वर्ष 2017-18 तक) में सामाजिक उत्तरदायित्व के कार्यों पर कुछ भी खर्च नहीं किया। वहीं एसईसीएल ने भी गत दो वर्ष में इन कामों के लिए कोई राशि नहीं दी।

ऐसे समझें एनटीपीसी, आईओसी की कंजूसी

एनटीपीसी ने वर्ष 2014-15 में छत्तीसगढ़ में 22.56 करोड़ रुपए सीएसआर के कार्यों पर खर्च किए थे। लेकिन इसके बाद से मानों कंपनी ने अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ दिया क्योंकि इसके बाद कंपनी ने कोई रकम खर्च नहीं की। राज्य में अपने कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (csr) के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रही (not serious)  हैं।

सार्वजनिक उपक्रम इंडियन ऑयल कारपोरेशन (ioc) का भी पूरे छत्तीसगढ़ में उक्त तीन सालों में सीएसआर कार्यों में कोई योगदान नहीं है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (एसईसीएल) ने भी दो साल- वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में सीएसआर का कोई काम नहीं किया। जबकि जिंदल कंपनी की ओर से लगातार सीएसआर के कामों पर पैसा खर्च किया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में सर्वाधिक खर्च

केंद्रीय कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017-18 में किए सीएसआर के कार्यों को लेकर रिपोर्ट बीते दिनों ही जारी की गई है। इसके मुताबिक, छत्तीसगढ़ की छोटी-बड़ी 115 कंपनियों ने सीएसआर के क्षेत्र में 72 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसमें सर्वाधिक 35.45 करोड़ रुपए की राशि शिक्षा के क्षेत्र में खर्च की गई। एनटीपीसी, एसईसीएल, बालको, आईओसी जैसी बड़ी कंपनियों का इस वर्ष योगदान नहीं रहा।

सेल ने दिखाई कुछ गंभीरता

सीएसआर कार्यों के प्रति सेल ने गंभीरता दिखाई। इसने 11.19 करोड़ रुपए खर्च किए। वहीं एसीबी इंडिया लिमिटेड ने 8.87 करोड़ रुपए सीएसआर कार्यों पर खर्च किए हैं। जबकि एसेंचर सॉल्यूशन प्रा. लि. ने 6.21 करोड़, जेपीएल-5.95 करोड़, आरएसपीएल-4.96 करोड़, एनवीसीएल-3.62 करोड़, अडानी-2.13 करोड़, जायसवाल निको- 2.9 करोड़ तथा शारदा इंजीनियरिंग ने 1.77 करोड़ रुपए सीएसआर कार्यों पर खर्च किए हैं। सीएसआर के तहत खर्च करने वाली कुछ अन्य कंपनियां भी हैं।

शीर्ष 10 राज्यों मेंं भी नहीं छत्तीसगढ़

कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में सीएसआर की सर्वाधिक रकम महाराष्ट्र में खर्च हुई। इसके बाद कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, दिल्ली, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश का स्थान है। इस मामले में शीर्ष 10 राज्यों की सूची में छत्तीसगढ़ का स्थान नहीं है।

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