रोजी-रोटी के लिए आज भी पलायन को मजबूर कबीरधाम के लोग

कवर्धा/नवप्रदेश। कबीरधाम जिले (kabirdham district) के हजारों ग्रामीण (villagers) रोजी-रोटी (for likelihood) की तलाश में आज भी दूसरे शहारों व राज्यों में पलायन (refugee) को मजबूर हैं। आांकड़े बताते हैं कि हर साल करीब 8 से 10 हजार लोग जिले से पलायन करते हैं। मतलब साफ है कि गांवों में बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है।
कहने के लिए तो रोजगार गारंटी योजना के तहत गांवों में काम चल रहा है और ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है, लेकिन उस अनुपात में नहीं जितने ग्रामीण बेरोजगारों की संख्या है। मनरेगा के तहत जिले में एक लाख 70 हजार 89 परिवार पंजीकृत हैं। इनमें तीन लाख 82 हजार 161 सदस्य हैं।

चार माह में 2.09 फीसदी लोगों को ही मिला मनरेगा का काम

इस वित्त वर्ष में चार माह के दौरान अब तक जिले के 3570 परिवार यानी 2.09 प्रतिशत लोगों को ही रोजगार गांरटी के तहत 100 दिन का रोजगार उपलब्ध नहीं हो सका है। मतलब साफ है कि ग्रामीणों को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण वे पलायन कर रहे हैं। आलम यह है कि बस स्टैंड पर सुबह यात्री बस के रायपुर से कवर्धा पहुंचने पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो जाती है। बस में चढऩे के लिए ग्रामीण टूट पड़ते हैं।

राशनकार्ड नवीनीकरण के लिए आए थे गांव

जो ग्रामीण अभी पलायन (refugee) कर रहे हैं वे राशन कार्ड नवीनीकरण के लिए अपने गांव पहुंचे थे तो कुछ त्योहारों के चलते भी अपने गांव आए हुए थे। अब ग्रामीण वापस पलायन कर रहे हैं। इसके बाद ये ग्रामीण दिवाली के समय वापस होंगे। दिवाली मनाकर फिर पलायन करेंगे और सीधे होली के समय वापसी करेंगे। यह सिलसिला सालभर चलता रहता है।

कवर्धा व पंडरिया ब्लॉक से सर्वाधिक पलायन

ग्रामीणों का पलायन मुख्य रूप से कवर्धा और पंडरिया ब्लॉक से अधिक होता है। हालात ये है कि इस ब्लॉक में खेती कार्य करने के लिए मजदूर नहीं मिल पाते। किसान परिवार एक-दूसरे के खेतों मे जाकर काम कर रहे हंै। वहीं अधिकतर ग्रामीण भोपाल, सूरत, लखनऊ, बंगलुरु, पुणे सहित अन्य बड़े शहरों में जा रहे हैं।

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